मातृभूमि सेवा मिशन

मातृभूमि सेवा मिशन

मातृभूमि सेवा मिशन 

एक परिचय

मातृभूमि सेवा मिशन एक आध्यात्म प्रेरित स्वैच्छिक सेवा संगठन है, जो युवाओं की करूणा एवं समाज के दायित्व बोध से संचालित है। मिशन की विधिावत् स्थापना युवा तरूण तपस्वी परिव्राजक डॉ॰ श्रीप्रकाश मिश्र के द्वारा स्वामी विवेकानन्द जयंती एवं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर 12 जनवरी 2003 को श्रीमद्भगवद्गीता जन्मस्थली कुरुक्षेत्र् में हुआ। मिशन विगत् पंद्रह वर्षों से मानवता की सेवा को अपना लक्ष्य बना कर अनवरत प्रयासरत है। मिशन समाज के कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ बच्चों, गरीब असहाय एवं जरूरतमंद बच्चों के सर्वांगिण विकास के लिए समर्पित है।
मिशन द्वारा ऐसे बच्चों को समस्त सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं। मिशन द्वारा अब तक लगभग 250 बच्चों को शिक्षित-दीक्षित कर राष्ट्र एवं समाज की मुख्य धारा से जोड़कर स्वावलम्बी बनाया जा चुका है। मिशन एक स्वैच्छिक संगठन होने के नाते अपने नि:स्वार्थ भाव से सहयोग करने वाले समाज के प्रति स्व-दायित्व बोधा से प्रेरित समूह के साथ निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। मिशन के द्वारा शीघ्र ऐसे ही 200 बच्चों के लिए आवासीय केन्द्र बनाना प्रस्तावित है।
मिशन के सेवा कार्यों को मॉरिसस गणराज्य के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, कैबिनेट मंत्री, उच्चायुक्त, जापान के राजदूत, पूज्य जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधोशानंद गिरि जी महाराज जैसे देश के मूर्धान्य संत, भारत में पदस्थ अनेक देशों के राजदूत सहित, भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एम.एन. वेंकटाचलैया, हरियाणा के पूर्व राज्यपाल, डॉ. आर. किदवई, उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल, माननीय श्री बी.एल. जोशी, हिमाचल के पूर्व राज्यपाल, न्यायमूर्ति वी.एसकोकजे, माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, अनेक प्रांतों के मुख्यमंत्री एवं मंत्री, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के माननीय सह सरकार्यवाह एवं कई अखिल भारतीय अधिकारी, योग गुरु डॉ. एचआर. नागेन्द्र, सीबीआई के पूर्व निदेशक जोगिन्द्र सिंह, विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक संगठनों के प्रमुख सहित प्रशासनिक अधिाकारी एवं गणमान्य जन प्रत्यक्ष रूप से अवलोकन कर अपना शुभाशीर्वाद प्रदान कर चुके हैं। मिशन का लक्ष्य समाज के ऐसे बच्चों को राष्ट्र की मुख्य धारा से जोड़कर देश का एक स्वावलम्बी एवं स्वाभिमानी नागरिक बनाना है। 
• मातृभूमि शिक्षा मंदिर-
मातृभूमि शिक्षा मंदिर जरूरतमंद, असहाय एवं कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा एवं मिशन द्वारा संचालित बालअभिमन्यु छात्रवास में आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जाती है ।
• वेद विद्यापीठम्-
मिशन प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा में समन्वय स्थापित कर एक विशेष विद्यापीठ के निर्माण में संलग्न है, जिससे विश्व मानवता की सेवा के निमित्त युवा-पीढ़ी तैयार हो सके।
• माँ सरस्वती पुस्तकालय-
प्राचीन भारत के विभिन्न महापुरूषों की जीवनियों से संबंधित अनेक सारी पुस्तकों का संग्रह है। पुस्तकालय संस्थान के विद्यार्थियों के लिए बहुत ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण साबित हो रहा है।
• कामधेनु गौशाला-
आश्रम के बच्चों के लिए दूध की पूर्ति के लिए एक लघु गौशाला की स्थापना की गई है। जिसमें मिशन के छात्रवास के विद्यार्थियों के लिए दूध का समुचित प्रबंध होता है।
• दैनिक गीता ज्ञान यज्ञ-
आश्रम परिसर में प्रतिदिन विद्यार्थियों तथा आश्रम पहुचंने वाले सहयोगियों द्वारा दैनिक गीता ज्ञान यज्ञ किया जाता है।
• कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र्-
समाज के जरूरतमंद बच्चों को जो कि आधुनिक शिक्षा का भारी खर्च वहन नहीं कर सकते, उन्हें मिशन द्वारा नि:शुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण दिया जाता है।
• ग्रामीण विकास कार्यक्रम –
ग्रामीण क्षेत्रें की प्रतिभाएं जो कि रोजगार के अभाव में निराशा की शिकार हैं, उनको रोजगार परक प्रशिक्षण के माधयम से स्वालम्बन एवं स्वरोजगार के लायक प्रशिक्षित किया जा रहा है।
• विवेकानन्द संगोष्ठी प्रकोष्ठ-
मिशन द्वारा समय-समय पर देश के महापुरुषों एवं विभिन्न सम-सामायिक विषयों पर सभा, संगोष्ठियों का आयोजन होता रहता है।
• स्वर्णिम-पथ पाक्षिक-
यह मातृभूमि सेवा मिशन का अधिकृत पाक्षिक पत्र् है। यह विभिन्न विषयों पर अनेक लेख आदि प्रकाशित होते हैं। इस पाक्षिक के माध्यम से अनेक सम-सामायिक विषयों पर देश की युवा पीढ़ी को अवगत् कराने का प्रयास रहता है।
• श्रीमद्भगवद्गीता शोध संस्थान-
मिशन द्वारा विगत् 16 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय श्रीमद्भगवद्गीता जयंती समारोह का आयोजन कर रहा है। जिसमें देश के अनेक धर्माचार्य, अनेक देशों के माननीय राजदूत, प्रशासनिक अधिकारी एवं सामाजिक क्षेत्र कार्यरत्, अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपति व प्रोफेसर, शोधार्थी सहित अनेक गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति रहती है।

मिशन द्वारा संचालित सेवा प्रकल्प
मातृभूमि शिक्षा मंदिर जरूरतमंद, असहाय एवं कुष्ठ रोगियों के स्वस्थ बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा एवं मिशन द्वारा संचालित बालअभिमन्यु छात्रवास में आवासीय सुविधा उपलब्ध करायी जाती है |
मिशन प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षा में समन्वय स्थापित कर एक विशेष विद्यापीठ के निर्माण में संलग्न है, जिससे विश्व मानवता की सेवा के निमित्त युवा-पीढ़ी तैयार हो सके।
आश्रम के बच्चों के लिए दूध की पूर्ति के लिए एक लघु गौशाला की स्थापना की गई है। जिसमें मिशन के छात्रवास के विद्यार्थियों के लिए दूध का समुचित प्रबंध होता है।

कार्यवाई के लिए बुलावा